एक बड़ा लक्ष्य तय करे और उसे हासिल करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं, एक सपना देखो, किसी सपने के लिए प्रयासरत हुए बिना अपने उज्जवल भविष्य की रचना आपके लिए कदाचित संभव न हो। जो कुछ उपलब्धि चाहते हो सपनों के पीछे पड़ जाना मानव स्वभाव के ताने-बाने में विद्यमान है, क्योंकि आपने अब तक भविष्य के बारे में विचार प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं की है। यदि आप स्वयं को आदर्शविहीन पायें तो अपने खास सपने की खोज करें एवं भविष्य की रचना में जुट जायें। उस सपने को सच बनाने का प्रयास प्रारंभ करना ही आपका अगला कदम है। सर्वप्रथम, यह आवश्यक है कि आपने सपना देख लिया है, किन्तु यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप उसे साकार करने में प्रयासरत हों; सुनने में यह बात ठीक लगती है किन्तु वैसा कर पाना आसान भी नहीं है। ऐसे स्वप्नदृष्टा न बनें जिसे केवल सपनों के सच होने का इंतजार रहता है। सपनों का सच होना उस दिशा में किये गये प्रयास के आकार एवं उसके लिए आपके आग्रह का ही परिणाम है। मैं नहीं चाहता कि कोई भी अपने आदशों के बारे में सपने देखते हुए जीवन-यात्रा करे। अतः लगातार स्वयं से प्रश्न करते रहें "इस सपने को सच क...
आम व्यक्ति अपने पूरे जीवन और कामकाज में अपने मस्तिष्क की सिर्फ एक या दो प्रतिशत क्षमता का ही इस्तेमाल कर पाता हैं, बाकी क्षमता रिज़र्व रहती है , जिसका शायद ही उसने कभी दोहन या उपयोग किया हो। आपको अपने जीवन में चमत्कारिक परिणाम पाने के लिए कोई चमत्कार करने की जरूरत नहीं है, आपको तो बस इतना करना है कि आपको अपने भीतर मौजूद मानसिक शक्ति का वर्तमान से थोड़ा ज्यादा इस्तेमाल करें, आपके सोचने की क्षमता में यह छोटा सा सुधार आपके जीवन में गहरे परिवर्तन कर सकता है, इसकी बदौलत आगे आने वाली महीनों और सालों में आप इतना कुछ हासिल कर लेंगे, जिसे देखकर आप और बाकी लोग हैरान रह जाएंगे। रूस के प्रोफेसर सर्जेई येफ्रमोव द्वारा कुछ साल पहले किए गए शोध के अनुसार अगर आप अपनी मौजूदा मानसिक क्षमता का सिर्फ पचास प्रतिशत उपयोग कर सकें, तो आप एक दर्जन यूनिवर्सिटीज से पीएच.डी. कर सकते हैं, आसानी से एक दर्जन भाषाएं सीख सकते हैं, और इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के पूरे बाईस वॉल्यूम कंठस्थ याद कर सकते हैं। रॉबर्ट कॉलियर के अनुसार "चीजों को उस रूप में न सोचे, जेसी वे हैं, बल्कि उस रूप में सोचें जैसी वे हो सक...