एक बड़ा लक्ष्य तय करे और उसे हासिल करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं, एक सपना देखो, किसी सपने के लिए प्रयासरत हुए बिना अपने उज्जवल भविष्य की रचना आपके लिए कदाचित संभव न हो। जो कुछ उपलब्धि चाहते हो सपनों के पीछे पड़ जाना मानव स्वभाव के ताने-बाने में विद्यमान है, क्योंकि आपने अब तक भविष्य के बारे में विचार प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं की है। यदि आप स्वयं को आदर्शविहीन पायें तो अपने खास सपने की खोज करें एवं भविष्य की रचना में जुट जायें। उस सपने को सच बनाने का प्रयास प्रारंभ करना ही आपका अगला कदम है। सर्वप्रथम, यह आवश्यक है कि आपने सपना देख लिया है, किन्तु यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप उसे साकार करने में प्रयासरत हों; सुनने में यह बात ठीक लगती है किन्तु वैसा कर पाना आसान भी नहीं है। ऐसे स्वप्नदृष्टा न बनें जिसे केवल सपनों के सच होने का इंतजार रहता है। सपनों का सच होना उस दिशा में किये गये प्रयास के आकार एवं उसके लिए आपके आग्रह का ही परिणाम है। मैं नहीं चाहता कि कोई भी अपने आदशों के बारे में सपने देखते हुए जीवन-यात्रा करे। अतः लगातार स्वयं से प्रश्न करते रहें "इस सपने को सच क...
किसी व्यक्ति द्वारा जब किसी वाइकल का निर्माण किया जाता है, और इस निर्माण प्रक्रिया में प्रत्येक उस चीज का आविष्कार किया जाता हैं। जो वाइकल के निर्माण के लिए आवश्यक है, आविष्कार के दौरान प्रत्येक उस चीज का परिक्षण किया जाता हैं, जब चीज अपनी परीक्षा में पास हो जाती है, तभी उस चीज के आविष्कार को पूर्ण माना जाता हैं, उन सभी चीजों के आविष्कारों को जोड़कर एक वाइकल का निर्माण किया जाता है, उस वाइकल में वह संपूर्ण सुविधाएं निर्माण प्रक्रिया के दौरान लगा दी जाती हैं, जो वाइकल के लिए आवश्यक है। वाइकल का आविष्कार पूर्ण होने पर उस वाइकल को किसी व्यक्ति द्वारा खरीद लिया जाता है, और उस व्यक्ति द्वारा उस वाइकल को अपने जीवनकाल में केवल दो प्रतिशत ही प्रयोग किया जाता है। जबकि उस वाइकल की प्रायोगिक क्षमता 100 प्रतिशत थी, उसका उपयोग हुआ केवल दो प्रतिशत। यही स्थिति आज के व्यक्ति की है, आज का व्यक्ति अपने जीवन काल में अपनी बुद्धि का उपयोग मुश्किल से 2 प्रतिशत करता है। जिस तरह से आज का व्यक्ति इस दुनिया में आता है, उसी तरह वापस इस दुनिया से चला भी जाता है, बिना कुछ इस दुनिया को दिए। जिन लोगों ने अपनी बु...