एक बड़ा लक्ष्य तय करे और उसे हासिल करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं, एक सपना देखो, किसी सपने के लिए प्रयासरत हुए बिना अपने उज्जवल भविष्य की रचना आपके लिए कदाचित संभव न हो। जो कुछ उपलब्धि चाहते हो सपनों के पीछे पड़ जाना मानव स्वभाव के ताने-बाने में विद्यमान है, क्योंकि आपने अब तक भविष्य के बारे में विचार प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं की है। यदि आप स्वयं को आदर्शविहीन पायें तो अपने खास सपने की खोज करें एवं भविष्य की रचना में जुट जायें। उस सपने को सच बनाने का प्रयास प्रारंभ करना ही आपका अगला कदम है। सर्वप्रथम, यह आवश्यक है कि आपने सपना देख लिया है, किन्तु यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप उसे साकार करने में प्रयासरत हों; सुनने में यह बात ठीक लगती है किन्तु वैसा कर पाना आसान भी नहीं है। ऐसे स्वप्नदृष्टा न बनें जिसे केवल सपनों के सच होने का इंतजार रहता है। सपनों का सच होना उस दिशा में किये गये प्रयास के आकार एवं उसके लिए आपके आग्रह का ही परिणाम है। मैं नहीं चाहता कि कोई भी अपने आदशों के बारे में सपने देखते हुए जीवन-यात्रा करे। अतः लगातार स्वयं से प्रश्न करते रहें "इस सपने को सच क...
हिटलर एक प्रचंड राष्ट्रवादी था, उसने छोटी सी आयु में ही उन संघर्षों में भाग लेना शुरू कर दिया, हिटलर राष्ट्रवाद की दिशा में बड़ी तेजी से बढ़ने लगा, और उसने 15 वर्ष की आयु में ही परंपरागत राष्ट्रीयता और जनसाधारण की धारणा पर आधारित राष्ट्रीयता के अंतर को स्पष्ट पहचानने लगा, और उसका झुकाव राष्ट्रीयता की और था।
इतिहास के अध्ययन का अर्थ है, कि उन शक्तियों को खोजना और पहचानना, जो उन कारणों के परिणाम है, जो हमारी आंखों के सामने ऐतिहासिक तथ्य बनाते हैं, पढ़ने और अध्ययन करने की कला का अर्थ है, आवश्यक को स्मरण रखना और अनावश्यक को छोड़ देना।
मेरे इतिहास के प्रोफेसर, जो पढ़ाने और लिखाने में उपयोगी दृष्टिकोण को कैसे लागू किया जा सकता है, बताते थे, कि आवश्यक को ग्रहण करना तथा अनावश्यक का त्याग करना, यह लिंज में रियालशूल के निवासी डॉक्टर लियोपोल्ड पुच्छ थे, जो इतिहास के अध्यापक थे, वे उन गुणों की जीती जागती तस्वीर थे, साथ ही साथ वे एक आकर्षक वक्ता भी थे, ये प्रोफेसर न केवल वर्तमान से उदाहरण लेकर भूतकाल का वर्णन कर सकते थे, बल्कि अतीत से वर्तमान के लिए एक सीख भी निकाल सकते थे, मुझे ऐसा प्रोफेसर मिलने के कारण ही इतिहास मेरा रुचिकर विषय बन गया, आज भी मैं उस कोमल व्यक्तित्व को याद कर भावुक हुए बिना नहीं रह सकता।
पाठशाला में इतिहास के अध्ययन में जिस तरह की ऐतिहासिक विचारधारा को मुझ में उत्पन्न किया, उसने फिर कभी मेरा पीछा नहीं छोड़ा, विश्व का इतिहास अब मेरे लिए असीम ज्ञान का एक स्रोत बन गया, इससे में तत्कालीन ऐतिहासिक घटनाओं को समझने में समर्थ हो सका, इस सब का परिणाम यह हुआ, कि मुझे राजनीति सीखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी।
यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात थी, कि उस छोटे से कस्बाई शहर में सुलभ साधनों ने मुझे इस योग्य बना दिया, कि मैं बाद में बेहतर कला प्रसंगों की प्रशंसा करने के योग्य बन सका।
मेरे कला प्रेम ने मेरे पिता द्वारा सुझाए गए व्यवसाय के विरुद्ध गंभीर प्रतिरोध पैदा करने में मेरी काफी सहायता की, और जवानी के अल्हड़पन के बढ़ने के साथ-साथ मेरा विरोध भी बढ़ता गया, मेरा विश्वास और भी दृढ़ हो गया कि मैं कलाकार बनना चाहता था, और वास्तुकला में मेरी रुचि बढ़ती जा रही थी, मेरे विचार में यह स्थिति चित्रकला के प्रति मेरी प्रकृति का सहज परिणाम थी, कि मुझे कभी विचार ही नहीं आया कि एक दिन कभी इसके विपरीत भी कुछ ऐसा हो सकता है........... एडोल्फ हिटलर
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