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एक बड़ा लक्ष्य तय करें और उसे हासिल करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं

एक बड़ा लक्ष्य तय करे और उसे हासिल करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं, एक सपना देखो, किसी सपने के लिए प्रयासरत हुए बिना अपने उज्जवल भविष्य की रचना आपके लिए कदाचित संभव न हो। जो कुछ उपलब्धि चाहते हो  सपनों के पीछे पड़ जाना मानव स्वभाव के ताने-बाने में विद्यमान है, क्योंकि आपने अब तक भविष्य के बारे में विचार प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं की है। यदि आप स्वयं को आदर्शविहीन पायें तो अपने खास सपने की खोज करें एवं भविष्य की रचना में जुट जायें। उस सपने को सच बनाने का प्रयास प्रारंभ करना ही आपका अगला कदम है। सर्वप्रथम, यह आवश्यक है कि आपने सपना देख लिया है, किन्तु यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप उसे साकार करने में प्रयासरत हों; सुनने में यह बात ठीक लगती है किन्तु वैसा कर पाना आसान भी नहीं है। ऐसे स्वप्नदृष्टा न बनें जिसे केवल सपनों के सच होने का इंतजार रहता है। सपनों का सच होना उस दिशा में किये गये प्रयास के आकार एवं उसके लिए आपके आग्रह का ही परिणाम है।  मैं नहीं चाहता कि कोई भी अपने आदशों के बारे में सपने देखते हुए जीवन-यात्रा करे। अतः लगातार स्वयं से प्रश्न करते रहें "इस सपने को सच क...

आत्मा जीवित है या मर चुकी है आप कैसे पता करेंगे

व्यक्ति के जन्म से ही उसके शरीर के साथ उसकी आत्मा का संबंध रहता हैं, लेकिन यह संबंध कब तक रहता हैं, सभी लोग मानते हैं, या ऐसी धारणा है, कि व्यक्ति जब तक जीवित रहता है, उसकी आत्मा उसमें निवास करती है।

 यह सही है, कि व्यक्ति जब तक जीवित हैं, तब तक उसमें आत्मा रहती हैं, लेकिन यह आत्मा कब तक उसमे क्रियाशील रहती हैं, इसके बारे में कोई कुछ नहीं बता सकता।

आत्मा की क्रियाशीलता उसके आत्मबोध पर निर्भर करती है, अगर आपकी सोच पॉजिटिव है, और आपकी आत्मा आपको रास्ता दिखाती है, तो आपकी आत्मा क्रियाशीलता है, इसके विपरित अगर आपकी सोच नेगेटिव है, और आपकी आत्मा आपको रास्ता नहीं दिखाती है, तो इसका सीधा मतलब है, कि आपकी आत्मा आपमें शून्य के समान निवास तो करती है, लेकिन आपको रास्ता नहीं दिखाती है, अर्थात आपकी आत्मा शांत अवस्था में चली गई हैं, अगर इसे सही अर्थ में समझा जाए, जिसे मानवीय भाषा कहते हैं, तो इसका सीधा मतलब है, कि व्यक्ति की आत्मा मर चुकी है।

अगर व्यक्ति की आत्मा मर चुकी है, तो यह आत्मा वापस कब जीवित होगी, इसके बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता, आत्मा का संबंध सीधा आत्मबोध से हैं, जब व्यक्ति का आत्मबोध, उसकी क्रियाओं से क्रियाशील होता है, तो उसकी आत्मा स्वत ही जीवित हो जाती है, और व्यक्ति को आत्मबोध होने लग जाता है, आत्मबोध का संबंध सीधा आत्मा से हैं, जो व्यक्ति को हर राह पर रास्ता दिखाती है।

यह तो मान सकते है, कि व्यक्ति की सोच का संबंध उसकी आत्मा से होता है, अगर उसकी सोच पॉजिटिव है, तो उसकी आत्मा क्रियाशील हैं, अगर उसकी सोच नेगेटिव है, तो उसकी आत्मा कब शून्य व्यवस्था में चली जाएगी, उसे स्वयं को ही मालूम नहीं होगा।

किसी भी चीज को प्राप्त करने से पहले आपको यह सोचना होगा, कि आपने उसके लिए क्या प्रयत्न किया है, अगर आपने उसके लिए कुछ भी प्रयत्न नहीं किया है, तो जिस तरह वह चीज आपको प्राप्त हुई थी, और जिस तेजी से प्राप्त हुई थी, उसी तेजी से वापस चली जाएगी।


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