एक बड़ा लक्ष्य तय करे और उसे हासिल करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं, एक सपना देखो, किसी सपने के लिए प्रयासरत हुए बिना अपने उज्जवल भविष्य की रचना आपके लिए कदाचित संभव न हो। जो कुछ उपलब्धि चाहते हो सपनों के पीछे पड़ जाना मानव स्वभाव के ताने-बाने में विद्यमान है, क्योंकि आपने अब तक भविष्य के बारे में विचार प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं की है। यदि आप स्वयं को आदर्शविहीन पायें तो अपने खास सपने की खोज करें एवं भविष्य की रचना में जुट जायें। उस सपने को सच बनाने का प्रयास प्रारंभ करना ही आपका अगला कदम है। सर्वप्रथम, यह आवश्यक है कि आपने सपना देख लिया है, किन्तु यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप उसे साकार करने में प्रयासरत हों; सुनने में यह बात ठीक लगती है किन्तु वैसा कर पाना आसान भी नहीं है। ऐसे स्वप्नदृष्टा न बनें जिसे केवल सपनों के सच होने का इंतजार रहता है। सपनों का सच होना उस दिशा में किये गये प्रयास के आकार एवं उसके लिए आपके आग्रह का ही परिणाम है। मैं नहीं चाहता कि कोई भी अपने आदशों के बारे में सपने देखते हुए जीवन-यात्रा करे। अतः लगातार स्वयं से प्रश्न करते रहें "इस सपने को सच क...
1. अपने दिमाग में पैसे की वह निश्चित मात्रा सोच ले जिसे आप हासिल करने की प्रबल इच्छा रखते हैं यही कहना पर्याप्त नहीं है कि मैं ढेर सारा पैसा चाहता हूं कोई निश्चित रकम सोच ले एक निश्चित रकम के पीछे एक मनोवैज्ञानिक कारण है जिसे हम आने वाले समय में देखेंगे।
2. जिस पैसे की आप प्रबल इच्छा रखते हैं उसके बदले में आप क्या देना चाहेंगे।
इस दुनिया में मुफ्त में कोई चीज हासिल नहीं होती याद रखें।
3. एक निश्चित तारीख तय कर लें निश्चित धनराशि प्राप्त करने के लिए।
4. योजना बना ले कि आप अपनी प्रबल इच्छा को कैसे पूरी करेंगे फिर चाहे आप तैयार हो या ना हो एकदम काम में जुट जाएं और इस योजना को कार्य रूप देने में लग जाएं।
5. आप कितना पैसा हासिल करना चाहते हैं उस की समय सीमा तय करें योजना द्वारा उस पैसे को हासिल करने का स्पष्ट विवरण लिखें।
6. अपने लिखे हुए शब्दों को रात को सोते समय पढ़ें और सुबह उठते समय जो शब्द आपने रात को पढ़े थे उसके बारे में आपके दिमाग में कौन से नए परिवर्तन उत्पन्न हुये है उस पर विचार करें और अपने आप को अपने शब्दों के अनुकूल ढालने का पूरा प्रयास करें जैसे आपको वह सब कुछ हासिल हो गया है जो आपने अपने शब्दों में लिखा है।
7. अगर आप में सचमुच में अमीर बनने की प्रबल इच्छा है तो यह इच्छा एक दीवानगी बन जाएगी और आपको खुद को यह विश्वास दिलाने में जरा भी कठिनाई नहीं होगी कि आपके पास धनराशि हाल ही में मौजूद हो।
8. आकर्षण का नियम व्यक्ति की सोच पर निर्भर करता है जितनी उसकी सोच धन प्राप्ति के प्रति साफ-सुथरी और अपने आप में धन के प्रति उसकी विचारधारा जैसी वह अपने मन में स्थापित करता है और जैसा वह धन के प्रति व्यवहार करता है उसी के अनुरूप धन की प्राप्ति होती है।
9. एक व्यापारी अर्थात बिजनेसमैन 24 घंटे अपने दिमाग में बिजनेस के बारे में विचार विमर्श और सोच विचार की विचारधारा उसके दिलो-दिमाग में प्रवाहित करता है उसी के अनुकूल आकर्षण का नियम उसकी विचारधाराओं के अनुकूल उसको वह सारे साधन लोग जो उसे अपने बिजनेस में विचार-विमर्श में उत्पन्न हुए तत्वों को पूर्ण करने के लिए आवश्यक होते हैं आकर्षण का नियम उन्हें प्रोवाइड करवाता है।
10. यह सब कैसे होता है आने वाले समय में इसके बारे में जानेंगे।
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जब आप अपनी सोच को बदलते हैं तो आप अपनी जिंदगी को भी बदल देते हैं।