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एक बड़ा लक्ष्य तय करें और उसे हासिल करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं

एक बड़ा लक्ष्य तय करे और उसे हासिल करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं, एक सपना देखो, किसी सपने के लिए प्रयासरत हुए बिना अपने उज्जवल भविष्य की रचना आपके लिए कदाचित संभव न हो। जो कुछ उपलब्धि चाहते हो  सपनों के पीछे पड़ जाना मानव स्वभाव के ताने-बाने में विद्यमान है, क्योंकि आपने अब तक भविष्य के बारे में विचार प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं की है। यदि आप स्वयं को आदर्शविहीन पायें तो अपने खास सपने की खोज करें एवं भविष्य की रचना में जुट जायें। उस सपने को सच बनाने का प्रयास प्रारंभ करना ही आपका अगला कदम है। सर्वप्रथम, यह आवश्यक है कि आपने सपना देख लिया है, किन्तु यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप उसे साकार करने में प्रयासरत हों; सुनने में यह बात ठीक लगती है किन्तु वैसा कर पाना आसान भी नहीं है। ऐसे स्वप्नदृष्टा न बनें जिसे केवल सपनों के सच होने का इंतजार रहता है। सपनों का सच होना उस दिशा में किये गये प्रयास के आकार एवं उसके लिए आपके आग्रह का ही परिणाम है।  मैं नहीं चाहता कि कोई भी अपने आदशों के बारे में सपने देखते हुए जीवन-यात्रा करे। अतः लगातार स्वयं से प्रश्न करते रहें "इस सपने को सच क...

व्यक्ति का दिमाग एक मशीन है

व्यक्ति का दिमाग एक मशीन है जो ऑटो सिस्टम पर काम करती है जैसा व्यक्ति सोचता है वैसा ही घटित होता है कितना व्यक्ति अपनी सोच को विस्तृत कर पाता है यह उसकी विचार करने की क्षमता पर निर्भर करता है वर्तमान में व्यक्ति किताबी ज्ञान के द्वारा अपने ज्ञान को विस्तृत कर पाता है लेकिन अगर हम आज से 5000 साल पहले की बात करें तो उस वक्त किताबें नहीं थी केवल व्यक्ति के विचार ही थे और विचार करने की उसकी दिमागी क्षमता थी उसकी वैचारिक क्षमता पर ही उसके सोचने समझने की कार्य क्षमता निर्भर करती थी इसका तात्पर्य यह माना जा सकता है कि उसका दिमाग एक मशीन है जो ऑटो बेस पर काम करता है अगर व्यक्ति के शारीरिक बनावट की बात करें तो 5000 साल पहले भी यही बनावट थी और आज भी वही बनावट है इसका मतलब सीधा सा है कि व्यक्ति का अस्तित्व इस पृथ्वी के सिवाय अन्य और भी स्थान पर हैं स्टीफन हॉकिंस ने कई बार इसका जिक्र भी किया है लेकिन उसका प्रमाण आज तक नहीं मिला है प्रमाण नहीं मिलने के और भी कारण हो सकते हैं लेकिन देखा जाए तो व्यक्ति के दिमाग की क्षमता 2% ही मान सकते हैं जब व्यक्ति के दिमाग की क्षमता इतनी कम है तो वह ऐसी चीज का निर्माण क्या कर पाने में सक्षम है जो उसकी स्वयं के अस्तित्व को बनाए रख सकें वर्तमान समय में पृथ्वी पर ऐसा कोई विमान नहीं है जो मानव जाति के अस्तित्व को बचाए रखने में सक्षम हो मानव जाति का अस्तित्व इस पृथ्वी के सिवाय अन्य स्थान पर हैं इसका कोई प्रमाण वर्तमान समय में उपलब्ध नहीं है लेकिन व्यक्ति का दिमाग एक मशीन है जो इसका प्रमाण देता है कि उसके साथ जो घटना घटित नहीं हुई उसका भी उसको एहसास करा जाता है इसका तात्पर्य यह माना जा सकता है इस पृथ्वी के सिवाय इस ब्रह्मांड में या इस ब्रह्मांड के सिवाय अन्य ब्रह्मांड में मानव जाति का अस्तित्व विद्यमान है ऐसा माना जा सकता है लेकिन इसके प्रमाण उपलब्ध नहीं है। लेकिन देखा जाए तो जिस समय इस पृथ्वी का निर्माण हुआ था उस समय अन्य ब्रह्मांड में भी अन्य पृथ्वी का निर्माण हुआ हो और मानव जाति का इतिहास इस पृथ्वी के सिवाय अन्य ब्रह्मांड में समय चक्र के अनुकूल हो। ऐसा प्रमाण आज का मानव वर्तमान समय में जुटाने में असक्षम है।

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